शनिवार, 31 दिसंबर 2011

अभिलाषा !

काम आऊं दूसरों के,
दर्द बांटूं मैं उनके,
मानव का कल्याण करूं ,
मेरी यह अभिलाषा है !

कभी न बुरा सोंचूं मैं,
किसी का बुरा न करूं ,
जीवन यथार्थ करूँ मैं,
मेरी यह अभिलाषा है ! 

मानवता का त्राण हरूं,
नव युग का विश्वास बनूँ,
पर हित का प्रयास करूं ,
मेरी यह अभिलाषा है !

किसी का मन न दुखे
किसी को दर्द न पहुंचे
मैं कर पाऊँ  कुछ ऐसा
मेरी यह अभिलाषा है ! 

भूख मिटे जो उदर की
खाए न ठोकर दर-दर की,
मिलजाय सबको ये सब ,
मेरी यह अभिलाषा है ! 

युद्ध लड़ना तो व्यर्थ है
प्रेम से जीते तो अर्थ है ,
भूलें सब भेद-भाव अब ,
मेरी यह अभिलाषा है ! 

1 टिप्पणी:

  1. दीप पर्व आपको सपरिवार शुभ हो!
    कल 02/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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