शनिवार, 24 दिसंबर 2011

किसे ढूंढते हैं, ये सूने नयन ?



किसे ढूंढते हैं,
ये सूने नयन ?



स्मृतियों में क्यों,
हो रहे विह्वल ,
किस हेतु उन्मीलित,
हैं ये अविरल /
स्पंदन हीन हृदय ,
औ नीरद अयन
किसे ढूंढते हैं,
ये सूने नयन ?



अछिन्न श्वासें
ढोकर ये जीवन,
भ्रमित भटका
कोलाहल, कानन/
कब मिलेगा मुझे,
वह चिर शयन!
किसे ढूंढते हैं,
ये सूने नयन ?



श्रांत हो चली अब,
ये आहत सांसें ,
होगा कब मिलन
पूर्ण होंगी आशें!
अपूर्ण रहा कुछ शेष ,
है अपूर्ण मिलन !
किसे ढूंढते हैं,
ये सूने नयन ?

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर भाव .... शब्दों का चयन बहुत खूबसूरत है ....

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  2. bahut badhiya shodon ka samagam...dhnywad kabhi samay mile to mere blog http://pankajkrsah.blogspot.com pe padharen swagat hai

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  3. शब्दों और भावों का बहुत सुन्दर संयोजन...बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं

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