सोमवार, 17 सितंबर 2012

तिमिर आज पूनम को पी गया !!


आह !ये कैसा 
हृदयाघात ;
चुभ रही न जाने 
कौन  सी ये रात ,
मौन है काल
कर रहा प्रत्याघात !
आज मृगांक भी 
पूर्णिमा को 
अमावस जी गया 

तिमिर आज 
पूनम को पी गया !!


ऊषा पूर्व
द्युति आछिन्न 
नक्षत्र सी,
हो रही 
निमीलित यह
किरण भी 
आशा की ! 
सोंच कर परिणाम,
समय  पूर्व आज;
छिप कहीं आज 
दिनकर भी गया! 

तिमिर आज
पूनम को पी गया !!

आएगा वह
प्रद्योतन
हरेगा त्रान;
करेगा शशांक को
निष्कलंक
वह अत्न!
जाने कहाँ आज
वह प्राची का वीर भी गया !

तिमिर आज
पूनम को पी गया !!

2 टिप्‍पणियां:

अन्य पठनीय रचनाएँ!

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...