शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

शब्दों की भूख

पेट की भूख को 
शब्द देने में
मैं खुद को 
असफल पाता हूँ !

एक पुरानी थाली,
जो खाली है,
सदियों से;
आज भी 
उसकी रिक्तता को
शब्द देने में 
मैं खुद को 
असफल पाता हूँ !

भूख कभी नहीं मरती;
मर जाता है 
भूख से पीड़ित आदमी!
और उसकी व्यथा को 
व्यक्त करने की छटपटाहट में,
जिन्दा रहते है शब्द 
जिन्हें कोई नहीं
मार सकता !

1 टिप्पणी:

  1. भूख को व्यक्त करने की छटपटाहट में बस शब्द ही बचते हैं ...बहुत खूब

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