सोमवार, 2 जनवरी 2012

!वेदना की अनुभूति !

वेदना की
अनुभूति तो होगी;
पर अनुभूति
वेदना को हो
जरूरी तो नहीं!


क्योंकि,
वेदना से पहले
अनुभूति का गला
घोंट दिया जाता है!

वेदना !
तो होगी  ही ,
अनुभूति होना
जरूरी तो नहीं!!

क्योंकि
वेदना के पश्चात,
अनुभूति करना
छोड़ दिया जाता है !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अन्य पठनीय रचनाएँ!

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...