बुधवार, 4 जनवरी 2012

अप्रतिम प्रकाश !


दूर हो जाय 
जीवन का अँधेरा
फैलाओ ऐसा ही 
अप्रतिम प्रकाश !

दीप  जलाने से 
नहीं मिटता 
अंतस का
व्याप्त अन्धकार !

जब हो 
प्रज्ज्वलित
ज्ञान का दीप,
बनकर स्वयं 
वर्तिका 
फैलाओ 
प्रेम का प्रकास !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अन्य पठनीय रचनाएँ!

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...